डीजल के अभाव में 102 सेवा ठप्प


बिहार में पहले से ही बीमार चल रहे स्वास्थ्य सेवा अब और बीमार हो चुका है ,मुख्यमंत्री जी जरा स्वास्थ्य सेवा को भी देख लीजिये यह जनता का मौलिक अधिकारों में से एक है ! अफसोस है स्वास्थ्य मंत्री के वजाय मुख्यम्नत्री जी आपको सम्बोधन करते हुए यह खबर लिखना पड़ रहा है लेकिन क्या करे इसे पटरी पर आपके सिवा और कोई ला भी तो नहीं सकता है ! मुख्यमंत्री जी मधुबनी के आधा दर्जन एम्बुलेंस डीजल के अभाव में बंद हो गए है ! ये एम्बुलेंस मरीजों को ढोने की वजाय खुद मरीज बन चुका है ! बेहतर इलाज के लिए दरभंगा रेफर हुए मरीज के परिजन दो सौ की जगह दो हजार में निजी एम्बुलेंस किराए पर लेने को मजबूर हो गए है ! एम्बुलेंस मेंटेनेंस करने वाली कम्पनी को इस समस्या का समाधान करने की फुर्सत नहीं है वे समस्या का समाधान करने की वजाय ड्राइवरों को धमकाने में लगे हुए है ! मामला मधुबनी जिले के एम्बुलेंस से जुड़ा है ! अक्टूबर महीने में राज्य स्वास्थ्य समिति ने एम्बुलेंस मेंटेनेंस का कार्य पशुपतिनाथ फाउंडेसन नाम के एक निजी संस्था को दिया है ! लेकिन कार्य के शुरुआती दौर में ही संस्था के लापरवाही के कारण कई एम्बुलेंस को खड़ा करना पड़ा है ! कुछ एम्बुलेंस महज पांच से छह हजार रूपये मेंटेनेंस खर्च की वजह से खड़ा है जबकि सात एम्बुलेंस में डीजल नहीं रहने के कारण खड़ा कर दिया गया है ! सरकारी एम्बुलेंस के अभाव में लोग निजी एम्बुलेंस के द्वारा मरीजों को ले जा रहे है ! जबकि सरकारी एम्बुलेंस की तुलना में निजी एम्बुलेंस का किराया दस गुना ज्यादा है ! उदाहरण के तौर पर दरभंगा के लिए सरकारी एम्बुलेंस का किराया 200 रुपया है जबकि निजी एम्बुलेंस से दरभंगा जाने पर 2000 रूपये किराया लिया जाता है ! सरकारी एम्बुलेंस साठ साल से ऊपर ,BPL कोटे एवं प्रसव के लिए मुफ्त में उपलब्ध रहता है जबकि निजी एम्बुलेंस में कोई कंसीडर नहीं है ! एक मरीज के परिजन ने बताया की हमने एम्बुलेंस के लिए फोन किया लेकिन ड्राइवर ने बताया एम्बुलेंस में तेल नहीं है मजबूरन निजी एम्बुलेंस से मरीज को ले जा रहे है ! एम्बुलेंस को हमें अठारह सौ रूपये देने पड़ेंगे ! वही एम्बुलेंस के टेक्नीशियन एवं संघ के जिलाध्यक्ष राजीव कुमार ने बताया की डीजल के अभाव में सात एम्बुलेंस खड़ा है ! मेंटेनेंस करने वाली कम्पनी को जब जानकारी दिया तो समस्या का समाधान करने की वजाय धमकी दे रहे है ! वही जिला के सिविल सर्जन ने बताया की हमें एक घंटा पहले सुचना मिला की एम्बुलेंस में तेल नहीं उपलब्ध हो पाया है ! हमने कम्पनी से बात किया है जल्द ही मामले को शॉट आउट कर लिया जाएगा ! एम्बुलेंस व्यवस्था को सुचारु ढंग से चलाने के लिए सरकार ने पशुपति फाउंडेसन को जिम्मेवारी दिया लेकिन यह संस्था एम्बुलेंस को सुचारु ढंग से चलाने की वजाय पंगु बना दिया है सवाल बड़ा है आखिर लाखों रूपये मेंटेनेंस के नाम पर लेने वाली इस संस्था का क्या काम है ?

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