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बुरी तकनीक का नमुना है मधुबनी बेनीपट्टी मुख्य सड़क



दो टुकरे में बँट गयी सड़क 
मधुबनी जिला में बाढ़ से हुई तबाही का अंदाजा उसके छतिग्रस्त हुए पुल , पुलिया एवं सड़को से लगाया जा सकता है ! NH 104 कई जगहो पर  कट गई है । मधवापुर प्रखंड अभी भी जिला से कटा हुआ है ! साथ ही मधुबनी को सीतामढ़ी से जोड़ने वाली एकलौती मुख्य सड़क पर हाल ही में बनाये गये छोटे पुल को बाढ़ की तेज धार अपने साथ ले गयी । इस तेज धार ने पुल के साथ साथ आस पास के पचास फिट तक के सड़क को भी तोड़ दिया । यह  घटना बेनीपट्टी प्रखंड के शिवनगर  से गुजरने वाली स्टेट हाइवे की है ।यह सड़क क्षेत्र का एक प्रमुख व्यापारिक सड़क है और इस सड़क पर से रोज़ हजारो वाहन गुजरते हैं ।धौंस नदी के महाराजी बांध के टूटने के साथ ही पानी बेकाबू हो गया और आसपास के सभी गांव जलमग्न हो गए ! बाढ़ के पानी की तेज धार को यह छोटी सी पुलिया नहीँ झेल सकी और  आखिरकार पानी की धारा और पुलिया के संघर्ष में सड़क टूटकर दो हिस्सों में बंट गया । 
नाविक की मनमानी 


स्थानीय लोग को नदी पार करने के लिये नाव का सहारा लेना पड़त है। नाविक एक बार पार करवाने के   दस रुपया लेता है । एक यात्री  ने बताया की मोटरसाइकल को नाव पर ले जाने के लिये उससे चालीस रुपया लिया  गया है । इस सड़क से रोजाना हजारो वाहन गुजरा करता था , जो अब पूर्णतया बंद हो गया है ! पुल इतना अधिक टूट चुका है की इसे बनाने में महीनो वक्त लग जायेगा ! आसपास के तक़रीबन तीन लाख लोग इस सड़क के टूटने से प्रभावित हुए है ! कहने को सरकार ने यहाँ सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात किया है और  सरकारी नाव की भी व्यवस्था की गयी है । परन्तु नाविक से लोग असंतुष्ट हैं।  यात्री के अनुसार उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है और उनसे मनमाना पैसे ऊसूले जाते हैं ।यात्री इतने कम रकम की शिकायत लेकर आखिर जाए भी तो कहाँ ? एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया की यहाँ हर यात्री से पैसे लिए जाते है पुलिस वाले बैठे रहते है और वे नाविक को कुछ नहीं कहते है ! 
सवालों के घेरे में पुल निर्माण कम्पनी 
यह वही पुल है जहा तक़रीबन एक साल पहले बस के तालाब में डूबने से पैंतीस व्यक्ति की मौत हो गयी थी ! इससे पहले भी पानी की तेज धार से यह पुल और सड़क टूट चुकी है । खराब और भ्रष्ट तक्नीकी के कारण यह सड़क पहले पैंतीस की मौत का जिम्मेवार थी अब तीन लाख लोगो के लिये परेशानी का सबब बनी हुई है ।बस दुर्घटना के बाद तत्कालीन डीएम ने सड़क निर्माण कम्पनी के द्वारा किये गए अनियमितता पर जाँच भी बैठाया था पर नतीजा सिफर रहा। अब एक बार फिर यह सड़क निर्माण कम्पनी सवालों के घेरे में दिखाई दे रही है ! यक्ष प्रश्न यह है कि आखिर पानी के दवाव वाले क्षेत्र में इतना छोटा पुल क्यों बनाया गया था ?⁠⁠⁠⁠

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