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मधुबनी मीडिया की खबरों के बाद हरकत में आई प्रशासन, कब्रिस्तान से मिलेगी बच्चों को मुक्ति

आजकल हर जगह स्वक्षता की बाते होती है होनी भी चाहिए लेकिन यह बाते तनिक उन स्कूलो के लिए भी लागू किया जाना चाहिए जिनका कब्रिस्तान में मध्याहन भोजन करना किस्मत बन चुका है ! यह स्कूल है जिले के अंधराठारी प्रखंड के हरना पंचायत में जहाँ बच्चों को आज भी कब्रिस्तान में बैठकर मध्याहन भोजन करना पड़ता है ! हालांकि madhubanimedia.com की टीम ने जब इस खबर को दिखाया था तो प्रशासन हरकत में आयी थी और जिला पदाधिकारी से लेकर सूबे के शिक्षा मंत्री तक ने मामले का जांच करने का बात कहा था ! जांच भी हुआ और प्रखंड संसाधन सेवी का तबादला कर खाना पूर्ति भी कर लिया गया !

नहीं बदली है स्कूल की तकदीर  
madhubanimedia.com का टीम जब दुबारा स्कूल में पहुंचा तो स्कूल का नजारा यथावत था ! वही दो कमरे सैकड़ो बच्चे और आधा दर्जन शिक्षक हां हमारे टीम को देखकर प्रधानाध्यापक ने बच्चों को कब्रिस्तान में मध्याहन करने से मना कर दिया था और इसलिए बच्चे कब्रिस्तान में मध्याहन करने के वजाय किताब काँपी के बस्ता पर थाली रखकर मध्याहन करते हुए दिखायी दे रहे थे ! हमने प्रधानाध्यापक से जब इस संबंध में बात किया तो उन्होंने बताया की हम बारी बारी से सभी को मध्याहन कराते है ! मध्याहन के लिए तीन चार बार बच्चों को कतारों में बैठाना पड़ता है ! यानी ऑड ईवन फार्मूला पर बच्चो को मध्याहन कराया जाता है ! भोजन के कतार में बैठे एक बच्चे ने बताया हम कब्रिस्तान में बैठकर खाना खा लेते है लेकिन आज मास्टर साहेब ने नहीं जाने दिया !

कमरे में बमुश्किल से बैठ पाते है बच्चे 
साढ़े चार सौ के करीब छात्रों वाले इस स्कूल में दो सौ से ऊपर बच्चे हर रोज स्कूल पहुंचते है ! स्कूल में दो कमरे है जिसमे आधा दर्जन शिक्षक सहित सभी बच्चे बमुश्किल से बैठ पाते है ! जब बैठने में इतना परेशानी है तो पढ़ाई कितना हो पाता होगा इसका आप सहज अंदाजा लगा सकते है ! हालांकि स्कूल में मध्याहन के अलावे पढ़ाई भी ऑड ईवन फार्मूला पर होता है ! एक शिक्षक ने बताया की हम बारी बारी से बच्चों को पढ़ाते है ! एक बार चौथी कक्षा एक बार पांचवी कक्षा फिर इसी तरह छठी सातवीं और आठवीं को पढ़ाते है ! हमारे पास जो संसाधन है हम उसी में पढ़ाने का प्रयत्न करते है ! जिला शिक्षा पदाधिकारी ने बताया की अभी स्कूल का भवन तैयार नहीं हुआ है ! कबिर्स्तान के बगल में जमीन है पर ग्रामीण उसे देने को तैयार नहीं है ! जैसे ही जमीन की उपलब्धता हो जायेगी हम भवन बनवा देंगे ! हलाकि ग्रामीणों ने बताया की स्कूल के लिए एक गढ्ढा वाला जमीन दिया गया है और उसमे मिटटी भी भर दिया गया है लेकिन उस मिट्टी को बैठने में शालभर समय लगेंगे जिसके बाद ही भवन तैयार हो पायेगा !

मदतगार की है तालास 
सरकार शिक्षा विभाग के सुधार के चाहे लाख दावे कर ले लेकिन विभाग अपने ढर्रे बदलने को तैयार नहीं है ! खबर चलती है तो जांच होता है पदाधिकारी भी बदले जाते है लेकिन व्यवस्था नहीं बदलता है ! देखना है मुख्यमंत्री के स्वागत में जुटा विभाग कब तक इस स्कूल के बच्चों को कब्रिस्तान से मुक्ति दिलाता है !

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