कब्रिस्तान में MDM



जिस कब्रिस्तान के बगल से गुजरने पर भी खौफ और डर लगता है यदि उस कब्रिस्तान में आपको हर रोज खाना खिलाया जाय तो आप कैसा महसूस करेंगे ! मैं समझता हु खाने की तो छोड़िये आप उस जगह हर रोज बैठना भी पसंद नहीं करेंगे ! लेकिन मधुबनी में एक जगह ऐसा भी है जहा एक तरफ मुर्दे है वही दूसरी तरफ पेट की आग बुझाते गरीब बच्चे ! आजतक आपने कब्रिस्तान में मुर्दो को जाते हुए देखा होगा लेकिन मधुबनी जिला का एक ऐसा स्कूल है जहां कब्रिस्तान में बच्चो को पढ़ाया ही नहीं जाता है बल्कि दोपहर का भोजन यानी MDM भी कब्रिस्तान में ही कराया जाता है !इस स्कूल में कुछ बच्चे कब्रिस्तान में MDM खाते है कुछ सड़को पर कुछ बच्चे तलाब के घाटों पर जबकि बचे हुए कुछ बच्चे मस्जिद के गेट पर बैठकर दोपहर का भोजन करते है ! इन बच्चो को तेज धुप में सड़क पर बैठकर MDM का इन्तजार करना पड़ता है !बच्चे अपना प्लेट लेकर MDM के इन्तजार में घंटो सड़क पर बैठते है !


यह जिला मुख्यालय से 60 किलोमीटर की दुरी पर स्थित अन्धराठारी प्रखंड के हरना पंचायत का उतर माध्यमिक विधालय है ! दो कमरो के इस स्कूल में 457 बच्चे पढ़ते है ! स्कूल में बर्ग एक से आठ तक को पढ़ाने के लिए आठ शिक्षक भी न्यूक्त है ! स्कूल में दस बाई दस के दो कमरो में चलाया जा रहा है जिनमे एक कमरा कार्यालय के रूप में इस्तेमाल किया जाता है जबकि एक में MDM का चावल रखा जाता है ! स्कूल का अधिकतर पढ़ाई कब्रिस्तान में मस्जिद के बचे हुए जमीन पर या फिर सड़को पर कराया जाता है ! प्रधानाध्यापक कहते है स्कूल में बहुत कठिनाई है कभी नीम पेड़ के पास कब्रिस्तान में पढ़ाना पड़ता है कभी सड़को पर कभी मस्जिद के वरामदे में कोई देखने सुनने वाला नहीं है !
यह कब्रिस्तान पढ़ाई तक ही सिमित नहीं है ! इस स्कूल के बच्चो को कब्रिस्तान में ही दोपहर का भोजन भी कराया जाता है ! प्लेट में MDM मिलने के बाद कुछ बच्चे भोजन कब्रिस्तान में करते है जबकि कुछ बच्चे स्कूल से सौ मीटर की दुरी पर स्थित तालाब के घाट पर भोजन करते हुए दिखाई देते है ! कुछ नाले पर बैठकर कुछ मस्जिद के मुहाने पर भोजन करते है ! हां कुछ बड़े क्लास के बच्चे जरूर सड़क पर बैठकर अपना भोजन लेने के बाद कमरो में अपना जगह बना लेते है !स्थानीय ग्रामीण कहते है इस स्कूल में कोई व्यवस्था नहीं है और कोई अधिकारी इस समस्या को समाधान करने वाला नहीं है !

यह नीतीश जी का पाठशाला है जहां के बच्चे कब्रिस्तान में पढ़ने के अलावा MDM भी खाते है ! ताज्जुब यह है की सरकार के आलाअधिकारियों को कभी इस स्कूल को देखने का फुरसत नहीं मिला है और ना ही मीडिया के माध्यम से जानने की जरुरत महसूस करते है !मधुबनी के  जिला शिक्षा पदाधिकारी का मोबाइल कभी खुला हुआ नहीं मिलता है जबकि मिलने की बात तो दूर है  ! अब देखना है की ज़िंदा में ही कब्रिस्तान पहुच चुके बच्चो को इस कब्रिस्तान से कब मुक्ति मिलता है ! 

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