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गीता के ज्ञान बिना मानव जीवन अधूरा,गीता के श्रवण मात्र से होती है मोक्ष की प्राप्ति कुलपति


न्यूज़ डेस्क पटना , 
हरलाखी, मधुबनी
मानव जीवन मे उनके द्वारा किये गए कर्मो का फल प्राप्त करते हैं । सनातन धर्म में गीता को सबसे बहुमूल्य ग्रंथ माना गया है। आज के समय में इस ग्रंथ की सार्थकता को विज्ञान ने भी स्वीकारा है । इसे वैज्ञानिको के द्वारा मानव टेक्नोलॉजी नाम दिया गया है। उक्त बातें विश्व विद्यालय पंचांग के प्रधान संपादक सह कामेश्वर सिंह संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ रामचंद्र झा ने कहा । वो हरलाखी प्रखंड क्षेत्र के हरसुवार गांव स्थित भारती संस्कृत उच्च विद्यालय के प्रांगण में आयोजित एक दिवसीय गीता जयंती समारोह में ग्रंथ की व्याख्यान कर रहे थे । उन्होने गीता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गीता का श्लोक सुनने मात्र से मानव जाती को काम, क्रोध, लोभ व मोह पर नियंत्रण प्राप्त हो जाता है । उन्होंने गीता को एकमात्र ऐसा ग्रंथ बताया जिसके बताए मार्ग से महाभारत में अपने पराए और पराए के फेर में फंसे योद्धा अर्जुन को ज्ञान की प्रप्ति हुई । उन्हेँ गीता का ज्ञान से युद्ध मे लड़ने की शक्ति मिला था । पूर्व कुलपति ने कहा गीता ग्रंथ के अनुश्रवण मात्र से मनुष्य के जीवन में विकास का मार्ग प्रसस्त्र होता है। मंच पर उपस्थित गीता ग्रंथ के विशेषज्ञ मिथिला के प्रसिद्ध विद्वान रुद्रकांत पाठक ने भी उपस्थित श्रोताओं को गीतासार से अवगत कराया। समारोह का विधिवत उद्घाटन के अवसर पर मिथिला के सुप्रसिद्ध विद्वान व पूर्व कुलपति डॉ रामचंद्र झा उग्रनाथ पाठक हरलाखी विधायक सुधांशु शेखर एवं जिला परिसद सदस्य सरिता देवी उपस्थित थी । 

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