पॉल्टिकल हंगामा में दिनभर उलझा रहा राजनगर और जिले का सभी पदाधिकारी बेबस नजर आये


न्यूज़ डेस्क ,पटना 
3 मार्च को राजनगर थाना क्षेत्र में एक कार सवार ने बाईक सवार दंपति को कुचल दिया था जिसमे बाईक सवार रिंकू देवी की मौके पे ही मौत हो गई थी वो गर्भवती भी थी । जबकि पति रंजीत शर्मा गंभीर स्थिति में डीएमसीएच दरभंगा में इलाजरत थे । पुलिस ने कार जप्त कर चालक को गिरफ्तार कर लिया था जिसे बाद में कोर्ट ने जमानत पर चालक को छोड़ दिया ! आज तड़के  इलाजरत रंजीत का भी मौत हो गया जिसके बाद ग्रामीण आक्रोशित हो गए और पुलिस पर चालक को छोड़ देने का आरोप लगाते हुए राजनगर थाना को घेर लिया और पथराव करने लगे । इस घटना में कई पुलिस कर्मी घायल भी हुए है । भीड़ पर नियंत्रण करने के लिए पुलिस को 13 राउंड फायरिंग भी करनी पड़ी । घटना की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी शीर्षत कपिल अशोक और पुलिस अधीक्षक दीपक वरनवाल अतिरिक्त पुलिस बल के साथ घटना स्थल पर पहुंचे । लेकिन आक्रोशित लोगों ने जिलाधिकारी की गाड़ी को भी घेर कर तोड़फोड़ करने लगे इस घटना में जिलाधिकारी बाल-बाल बच गए । अंतिम खबर लिखे जाने तक मृतक के परिजनों को चार चार लाख रुपया मुआबजा और कई सारे अस्वासन दिए गए है ! हंगामा करने वालो ने प्रशासन से जबरन लिखित अस्वासन लिया है की इस तोड़फोड़ की जिम्मेवारी प्रशासन की है , लेकिन इस पॉल्टिकल हंगामा ने एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है क्या पांच सौ से एक हजार की भीड़ जमा होकर किसी भी गैरकानूनी काम को आसानी से करा सकती है ? क्या जबरन हंगामा तोड़ फोड़ और सरकारी संपत्ति का नुकसान कर मुआबजा एवं सरकारी नौकरी लेने का यह सबसे आसान तरिका है ? देखना है की इतने बड़े हंगामा के बाद पुलिस दोषियों पर कारवाई करती है या फिर अननोन पर्सन के विरुद्ध मामला दर्ज कर खाना पूर्ति करता है !

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