अँगूठा लगाकर मिलेगा खाद ,आधार से लिंक हुआ खाद का सब्सिडी .आधार कार्ड से मिलेंगे खाद


डीएम ने पॉस मशीन से उर्वरक बिक्री की शुरुआत की

अब किसानों को पोओएस मशीन में अंगूठा लगाकर ही उर्वकर मिलेगा। एक जनवरी से यह व्यवस्था लागू कर दी गयी है . किसानों को उर्वरक खरीदने के लिए आधारकार्ड बिक्रेता के पास ले जाना होगा। विक्रेता मशीन में आधार का नंबर डालकर किसान से अंगूठा लगाकर वेरीफिकेसन करेगा एवं रसीद देगा, जिसपर उर्वरक की कीमत अंकित रहेगी .सोमवार को डीएम शीर्षत कपिल अशोक ने महिला कॉलेज रोड स्थित किसान सेवा केन्द्र पर पोओएस मशीन से उर्वरक की बिक्री शुरू करवाया। डीएम ने फीता काटकर नई सेवा की शुरुआत किया है . इस दौरान डीएम ने प्रखंड कृषि पदाधिकारी से कई बातें पूछी। उन्होने दुकानदार का स्टॉक की इंट्री, दुकान में रखे उर्वरक और अन्य समान की एक्सपायरी जाँच करने की बाते पूछा . मधुबनी में करीब 395 उर्वरक विक्रेताओं ने पोओएस मशीन वितरण किया गया है। इसमें से 25 दिसंबर से 31 दिसंबर तक करीब 315 विक्रेताओं के उर्वरक स्टॉक की इंट्री करवाई। थोक उर्वरक विक्रेता सिर्फ पॉस मशीन अधिष्ठापित खुदरा उर्वरक व्यवसायी के साथ ही उर्वरक का व्यवसाय करेंगे। उर्वरक के क्षेत्र में डीबीटी के लागू होने के बाद इस क्षेत्र में रीयल टाइम वेरीफिकेशन एवं रीयल टाइम डाटा और स्टॉक अपडेशन, एकनॉलेजमेंट, सेल परचेज इत्यादि डिजिटली एवं रीयल टाइम बेसिस पर होगा। इस नई तकनीक के आ जाने से उर्वरक की कालाबाजारी पर लगाम लगेगी। वहीं उचित मूल्य पर उर्वरक किसानों को उपलब्ध होगा। सामान्य रूप से उर्वरक की उपलब्धता रहेगी। इसकी ऑनलाइन मॉनिटरिंग भी होगी। केन्द्र सरकार उर्वरक अनुदान की राशि उर्वरक कंपनियों को सिर्फ पोओएस मशीन पर उर्वरक बिक्री पर ही अनुदान की राशि मिलेगी। उद्घाटन के दौरान जिला कृषि पदाधिकारी रेवती रमण, अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार, बीडीओ संजीत कुमार, प्रखंड कृषि पदाधिकारी अजय कुमार झा, कृषि समन्वयक रंधीर भारद्वाज, एसए रब्बानी, सहित कई अन्य लोग मौजूद थे। 

मशीन में गड़बड़ी की करें रिपोर्ट: डीएम

डीएम शीर्षत कपिल अशोक के समक्ष ही उद्घाटन के दौरान पोओएस मशीन में परेशानी दिखी। एक किसान को कई बार मशीन में अंगूठा लगाना पड़ा बावजूद आधार का वेरीकेशन नहीं हो पाया। इसपर डीएम ने डीएओ रेवती रमण से कहा कि इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था कराएं। इसकी रिपोर्ट आज ही निदेशालय भेज दें। ताकि किसानों को परेशानी नहीं हो। कई किसानों का अंगूठा नहीं मैच करने से उर्वरक खरीद में परेशानी नहीं हो। इसके बदले किसी दूसरे वैकल्पिक पहचान पत्र की व्यवस्था हो सके वह भी करें।  

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