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अंधराठाढ़ी बीडीओ पर लगा 25 हजार का अर्थदंड



झंझारपुर  : अंधराठाढ़ी प्रखण्ड के लोक सूचना पदाधिकारी सह प्रखण्ड विकास पदाधिकारी का अगले माह के वेतन मद से 25 हजार की राशि रोकने का आदेश राज्य सूचना आयुक्त दिया गया है. प्रखंड लोक सूचना पदाधिकारी पर यह कार्रवाई सूचना आवेदक मो. सरफराज सिद्दीकी द्वारा मांगी गयी सूचना देने में आनाकानी करने के विरुद्ध में आयोग द्वारा की गयी है. जिसमें आयोग ने गंभीरता से लेते हुये प्रखंड लोक सूचना पदाधिकारीको अपने अगले आदेश की तिथि 26 जुलाई तक का मोहल्लत देते हुये आवेदक को सही सूचना देने का निर्देश दिया है. अन्यथा आयोग की कार्रवाई तय मानी जा रही है. आयोग इसी मामले में लोक सूचना पदाधिकारी को हरना पंचायत के पूर्व पंचायत सचिव ललन ठाकुर का वेतन सूचना उपलब्ध कराने तक रोकने का आदेश पहले दे चूके है. बावजूद संबंधित कर्मी और अधिकारी अपनी हड़कत से बाज नही आये. लोक सूचना अधिकार कानून का अधिकारियों द्वारा किस कदर मजाक बनाया जा रहा है, इसकी एक बानगी तो सामने आ गयी, वहीं दर्जनों आवेदन आयोग के समक्ष लंबित है. बहरहाल प्रखण्ड विकास पदाधिकारी का वेतन मद से 25 हजार की राशि काटे जाने का आयोग द्वारा आदेश निर्गत होने की बात क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है. 


क्या है मामला
प्रखण्ड के हरना पंचायत में सरकार द्वारा दी जा रही विभिन्न पेंशन योजनाओं में लूट मची है. सैकड़ों की संख्या में फर्जी लाभूक अधिकारियों से साठ गांठ कर सरकारी राशि का दूरूपयोग कर रहे है. जबकि दर्जनों वृद्व, निसहाय पेंशन के लिये कार्यालय का चक्कर काट रहे है. अयोग्य व 35 वर्ष की विवाहित महिलायें लक्ष्मीबाई विधवा पेंशन प्राप्त कर रही है. 40 वर्ष के लोगों को पंचायत में वृद्वा पेंशन मिल रहा है. आवेदनकर्ता सरफराज सिद्दीकी द्वारा पंचायत में मची लूट खसोट को रोकने के लिये सूचना आवेदन के जरीय पंचायत के पेंशनधारियों की पूरी सूची मांगा गया था. जिसके बाद पेंशनधारियों की सूची की मांग करते ही खलबली मच गयी. सूची देने में आनाकानी करने व समय पर सूचना नही मिलने पर आवेदक द्वारा इसकी शिकायत आयोग के समक्ष दर्ज करायी गयी. राज्य सूचना आयोग द्वारा मामले को गंभीरता से लेते हुये प्रखंड लोक सूचना पदाधिकारी को आवेदक श्री सिद्दीकी को पहले सूचना अपल्बध कराने का निर्देश देते हुये सूचना देने में विलंब का कारण पुछा. आयोग द्वारा मामला को संज्ञान में लेते ही पंचायत से प्रखण्ड तक हड़कंप मच गया. कारण प्रखण्ड के अन्य पंचायतों में इसी तरह के मामले की कमी नही है. आयोग द्वारा सूचना विलंब के कारणों का जबाव देते प्र. लो. सू. पदा. ने तत्कालिन पंचायत सचिव द्वारा पूर्ण प्रभार नही दिये जाने की बात कह कर पल्ला झाड़ना चाहा.

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जिस पर आयोग ने जान बुझकर लापरवाही का आरोप लगाते हुये सूचना अधिकार अधिनियम की धारा 20(1) के तहत अर्थदंड का आदेश दिया है.

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