कम्बख्त इस दस हजारी ने रोहिणी को सड़क पर ला खड़ा कर दिया

 

न्यू


ज़ डेस्क पटना 

बिहार चुनाव की औपचारिकताएं पूरी तो हो गई, NDA के पक्ष में ऐसा सुनामी आया जिसका प्रभाव लालू परिवार में उथल-पुथल मचा दिया। प्रदेश की महिलाओं ने तेजस्वी भैया के घर में ऐसी लंका लगाई की घर की बात चौराहे तक आ पहुंची। चुनावी शिकस्त से लालू के लाल और बेटी रोहिणी आचार्या के बीच की दूरी इतनी बढ़ गई की मामला चौराहे तक आ पहुंची। तेजस्वी यादव के सिपहसलार संजय यादव को लेकर लालू के घर ऐसी आग लगी की बेटी रोहिणी को घर से निकलना पड़ गया। हालांकि तेजस्वी ने पार्टी की हार पर दलील देते हुए कहा कि हमने तो मेहनत किया अब रिजल्ट पक्ष में नहीं आया तो मेरे दोस्त को बदनाम किया जा रहा है। बात इतनी बढ़ गई की तेजस्वी की दीदी रोहिणी ने अपना सामान समेट बाहर का रास्ता अख्तियार कर लिया। अब इस मसालेदार खबर की भनक कुछ युट्यूबर व पत्रकार साथी को लग गई, देखते ही देखते यूट्यूबर तत्काल पटना एयरपोर्ट पहुंचे और रोहिणी से सवाल जवाब करने लगे। माईक सटाते ही दीदी ने तेजस्वी भैया के बारे में ऊल जुलूल बक दिया। यह बात और है की रोहिणी दीदी पटना में रहती थी इसलिए भेद जल्दी खुल गया। हालांकि कई दीदियों का हाल अपने-अपने घरों में क्या हुआ होगा यह अनुमान लगाया जा सकता है।

रोहिणी दीदी आप फ़ालतू में संजय यादव को लपेटे में ले रहे है। आप तो शादी करके फॉरेन में सैटल हो गई हैं। गांव की महिलाएं गांव में ही रह गयी और यह बात यहीं से शुरु होती है। आप उधर थे और इधर चाचाजी ने भौतिकतावादी युग में पहले जीविका के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का सपना दिखाया फिर कुकुरमुत्ते के तरह माइक्रो फाइनेंस कम्पनी ने समाज के एक बड़े वर्ग की महिलाओं को इस जंजाल में जकड़ लिया। यह बात दीगर है की आज बिहार में महिला आत्मनिर्भर की जगह कर्ज निर्भर बन गयी है। कर्ज चुकाने के लिए कर्ज की तालास में सुबह से जुट जाती है। पहले एक माइक्रो फाइनेंस से कर्ज लिया और उन पैसों को अपने जरुरत के लिए इस्तेमाल कर लिया फिर जब चुकाने की बारी आयी तो दूसरे से लेकर चुकाया फिर तीसरे और चौथे ऐसे क्रम में अधिकतर ग्रामीण महिलाएं दर्जनों माइक्रो फाइनेंस से कर्ज लेकर आज कर्जदार बनी हुई है। 

माइक्रो फाइनेंस कम्पनी के सर जी कर्ज वसूलने के लिए महिलाओं के दरवाजे पर सुबह से बैठे रहते है। ऐसे में सरकार ने महिलाओं के डूबती हुई नैय्या को एक तिनका या फिर आसान भाषा में कहें तो लाइफ जैकेट दिखाया अब भला उस लाइफ जैकेट को कौन नहीं पकड़ना चाहेगा। हिलोरें मारती फाइनेंस कम्पनी का व्याज और फाईन से डूबती हुई जिंदगी में सरकार का दस हजार वाला सहारा लाइफ जैकेट के सामान प्रतीत हुआ, साथ ही दो लाख रुपया का लॉलीपॉप भी दिखाया गया था। महिलाओं को लगा दो लाख के जहाज में बैठकर वो सुरक्षित हो सकती है। इन रोज रोज के झिक-झिक से आजादी मिल जायेगी। सुबह से साम तक फाइनेंस वाले सर जी का गाली नहीं सुनना पड़ेगा,छोटा सा व्यापार खोलेंगे और जिंदगी पटरी पर लौट आएगी। फिलहाल उस पटरी पर प्रवासी मजदुर अपने अपने काम पर दिल्ली मुंबई जैसे शहरों में लौटने लगे है। किसी की पत्नी किसी की माँ किसी की बहन ने समझाया होगा जब इतने दिनों तक महानगरों में जिंदगी काटे हो तो कुछ और दिन जिंदगी काट लो। 
वहीं प्रशांत किशोर को अगले चुनाव में जीता देंगे तब तक अपना व्यापार चल निकलेगा, हम अमीर हो जाएंगे। फिलहाल तो तुम जितना कमाते हो वह फाइनेंस वाले वसूल कर चले जाते है। बिहार में एक कहावत है 'मजबूरी का नाम महात्मा गांधी'। ये कहावत किसने और कब बनाई ये मत पूछना ठीक वैसे ही जैसे NDA गठबंधन को 200 से अधिक सीट कैसे मिली? फिलहाल तो खिसियानी बिल्ली खंभा नोचती हुई कहीं मिल जाए तो उसे बिना डिस्टर्ब किये कट लो इसी में समझदारी है।

Post a Comment

0 Comments