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कालिदास का है मधुबनी से कनेक्शन ,मधुबनी में हुआ है कालिदास को ज्ञान की प्राप्ति

न्यूज़ डेस्क पटना 
कालिदास का है मधुबनी से कनेक्शन ,मधुबनी में हुआ है कालिदास को ज्ञान की प्राप्ति ऐसा हम नहीं मधुबनी में मौजूद कालिदास का डीह साबुत के रूप में मौजूद कह रही है ! मधुबनी के डीह पर उपस्थित पंडितो का मानना है की आज से लगभग सत्रह सौ वर्ष पहले जब कालिदास कालिया हुआ करते थे तो वे भटकते भटकते मधुबनी के उच्चैठ स्थित एक गुरुकुल पहुंचे थे जहाँ वे विद्वान होकर उज्जैन लौटे ! उनकी कई रचनाएँ आज भी मौजूद है ! अभिज्ञान शाकुंतलम, मालविकाग्निमित्रम, विक्रमोवशीयम रघुवंशम कुमारसंभवम मेघदूत और ऋतुसंहार प्रमुख है ! दरअसल कालिया से कालिदास बनने की कहानी में उच्चैठ वासिनी भगवती का आशीर्वाद की महत्ता को आज भी लाखों भक्त मानते है ! कहते है किसी जमाने में राजा भोज की बेटी विधोत्तमा बहुत ही विद्वान थी ! ज्ञान इतना की अच्छे से अच्छा विद्वान को भी सास्त्राथ में हार का मुंह देखना पड़ता था ! और इसी ज्ञान के कारण विद्वानों ने विधोत्तमा के प्रति ईर्ष्या पाल लिया था ! और जब विद्योत्तमा की विवाह की बेला आयी तो कलिया जैसे मुर्ख को विद्वान बना कर विवाह करा दिया ! कालिदास की मूर्खता का अंदाजा इसी बात से लगाया जाता है वे जिस डाली पर बैठे थे उसी डाली को काट रहे थे और इसी मूर्खता को देखकर विद्वानों ने मुर्ख कालिदास का विवाह राजकुमारी विधोत्तमा से करा दिया ! लेकिन कलिया उर्फ़ कालिदास की मूर्खता का भेद जल्द ही खुल गया और विधोत्तमा ने कालिदास को भगा दिया जिसके बाद वे भटकते भटकते मधुबनी जिला के बेनीपट्टी स्थित उच्चैठ पहुंचे और एक गुरुकुल में रसोइया का काम करने लगे ! एक दिन की बात है मूसलाधार वारिश हो रही थी गुरूजी आश्रम में नहीं थे और समस्या यह थी की उच्चैठ भगवती का हर शाम होने वाली आरती करने को कोई छात्र तैयार नहीं था ! दरअसल मंदिर नदी के दूसरे तरफ थी और नदी में बाढ़ आयी हुई थी ! छात्रों ने सोचा कालिदास मुर्ख है उसे ही भेज देते और छात्रों ने कहा कालिदास आरती तुम कर आओ और हाँ वहां तुम कोई निसान भी छोड़ आना ताकि सुबह पता चल पाए तुम वहाँ गए थे ! जिसके बाद कालिदास मंदिर पहुंच कर आरती किये और निसान छोड़ने के लिए जगह ढूंढने लगे ! फिर कालिदास ने सोचा कही और निसान लगाऊंगा तो धूल जाएगा इसलिए क्यों ना उच्चैठ भगवती के चेहरे पर ही कालिख लगा दू सुबह सभी देख लेंगे ! यह सोचकर कालिदास ने जैसे ही भगवती को कालिख लगाना चाहा उच्चैठ वासिनी भगवती ने कालिदास का हाथ पकड़ लिया और कहा मैं तुम्हारी भक्ति से काफी प्रसन्न हु बताओ तुम्हे क्या चाहिए ! कालिदास मुर्ख थे उन्होंने कहा मुझे विद्वान बना दे माता ! भगवती उच्चैठ वासिनी ने कहा जाओ आज तुम्हारे पुस्तकालय में जितनी भी किताब है उसे छू देना सभी किताबो का ज्ञान तुम्हें मिल जाएगा ! उसके बाद कालिदास ने ऐसा ही किया और रातभर में ही वे विद्वान हो गए और कालिया से वे कालिदास बन गए ! बाद में उन्होंने विधोत्तमा को सास्त्राथ में हराया !

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