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उधर बाढ़ सम्पत्ति ले डूबा और इधर डॉक्टर बच्चा को छुपा लिया :शर्मनाक

___________डॉक्टर को भगवान का रुप कहा जाता है मगर कुछ ऐसे भी हैं जो पैसे के लिये मानवता को कंलकित करने में लगे है...। पूर्वी चम्पारण जिले में एकाएक आयी प्रलयकारी बाढ से जान बचाकर दम्पति दर दर भटकने पर  विवश और दूसरी तरफ़ डॉक्टर रुपये लेकर ही बच्चे की जानकारी देने पर अडे... राहत शिविर में जिन्दगी की जंग लड रहे दम्पति को पूर्व केन्द्रीय मंत्री का सहारा....मगर फिर भी मासूम मां से दूर ...।

बंजरिया थाना के अजगरी निवासी युवा दम्पति अपने ही कलेजे के टुकडे को पाने के लिए भटकने को विवश है...। आज से करीब 20 दिन पहले दम्पति के आंचल में खुशियां आयी थी...। मोतिहारी के सदर अस्पताल में ये महिला सुमन देवी  मां बनी जिनके पति का नाम हरिद्वार सहनी है .....लेकिन नवजात जन्म से ही बीमार था...जिसे मोतिहारी नगर के ही एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया...। भर्ती होते ही पहले तीस हजार रुपये की माँग की गयी  ..फ़िर उन्हे और बीस हजार रुपये लाने के लिये अस्पताल वालों ने कहा ...। रुपये के इंतजाम की में जब दम्पति घर गये तभी एकाएक बाढ आ गयी..जिसमें उनका घर गिर और उनकी सारी जमापूंजी बाढ़ में बेह गयी ।.. सडक पर किसी तरह पहूंचकर दम्पत्ति ने अपनी जान बचाई और एनएच 28 पर बने राहत शिविर में रहने लगे...। रुपये के आभाव में उन्होने अपने बच्चे को पाने की लालसा ही छोड दी ...। राहत शिविर के कार्यकर्ताओं को जब यह जानकारी मिली तो उन लोगों ने बच्चे की खोज शुरु की ...। अब अस्पताल प्रबंधन 50 हजार रुपये लिये बिना बच्चे की जानकारी तक देने से मना कर रहा है ...। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अस्पताल ने बच्चे को नगर  थाना के माध्यम से किसी अनाथ आश्रम में भेज दिया है .... सुनिये दम्पति की पीडा...वे बेचारे कैसे अपने दिल के टुकडे के लिए बेचैन है...

मंत्री जी के प्रयास के बावजूद दो दिन गुजर चुके हैं लेकिन अभी तक दम्पति को बच्चा नहीं मिल सका...। अब मंत्री जी ने भी ठान ली है कि दम्पति को बच्चा वापस दिलाकर ही दम लेगें...। सुनिये मंत्री जी बात...।

प्रलयकारी बाढ ने कई घरों को तबाह किया है...तो इन बेचारों के जिंदगी की तबाही में डॉक्टर साहब की भूमिका क्या कम है ...। ऐसे मानवता को शर्मसार करने वालों पर कडी कारवाई करने की जरुरत है...।

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