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मधुबनी में पुलिस कस्टडी से फरार हुई फर्जी छात्रा मोना सिंह


मधुबनी जिले में पुलिस कप्तान चुस्त है तो उनके सिपहसलार सुस्त है. आलम यह है की पुलिस हाजत अपराधियों का ससुराल बन गया जहां अपराधी रात गुजारने के लिये पंहुचते हैं. एक तरफ़ एसपी दीपक बरनवाल कि मुस्तैदी से महज चौबीस घंटे मे अपहृत बच्चे को बरामद कर पुलिस अपना विश्वास को बढ़ा रहे है वहीं थाना प्रभारी की सुस्ती से जिले मे लागातार पुलिस कि गिरफ्त से आरोपी फरार होने मे कामयाब हो रहे है. रविवार को हरलाखी थाना के हाजत से गैंग रेप का आरोपी आसानी से फरार हो गया वहीं आज फर्जी छात्र मोना सिंह बड़ी आसानी से महिला थाना के हाजत से फरार हो गयी है. यह वही मोना सिंह है जो कल शिक्षक पात्रता परीक्षा के दौरान शिवगंगा बालिका उच्च विद्यालय से गिरफ्तार कि गयी थी. मोना सिंह दूसरी छात्र के बदले परीक्षा दे रही थी. बताया जा रहा है कूछ फर्जी मजिस्ट्रेट बनकर बीएमपी वालों के पास गये और मोना सिंह को सुपुर्द करने को कहा और बीएमपी वालों ने बिना किसी वरीय अधिकारी से बात किये और बिना किसी कागजात की जांच किये उसे सौंप दिया जिसके बाद वह लापता हो गयी.

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हालांकि घटना के बाद मधुबनी पुलिस अधीक्षक दीपक वर्णवाल ने सम्बंधित सभी बीएमपी एवं पुलिस पर कार्यवाही का निर्देश दिया है. लेकिन सवाल बड़ा है आखिर कामयाबी का सेहरा लेने वाले थाना प्रभारियों पर कार्यवाही क्यों नही ? क्या सिपाही एवं चौकीदार थाना प्रभारियों के नियंत्रण मे नही है ?कल जब गैंग रेप आरोपी हाजत से भागा था तो हरलाखी थाना प्रभारी ने भी सारा दोष चौकीदार पर डाल कर अपना हाथ खड़ा कर लिया वही आज नगर थाना प्रभारी भी अपना सारा दोष बीएमपी पर मढ़ कर स्वयं को बचाने मे जुटे हैं. सवाल यह भी है आखिर कल 11 बजे दिन मे जिसकी गिरफ्तारी हुई वह आज दिन के दस बजे तक हाजत मे क्या कर रही थी ? फिलहाल ऐसे कई सवाल जवाब ढूंढ रही है लेकिन इस तरह के लापरवाही प्रशासनिक चुस्ती पर सवालिया निशान उठाती है. ताज्जुब इस बात का है नगर थाना प्रभारी को इस बात की खबर उस वक्त लगा जब वह दिन मे उसे लेने गये. हालांकि कल से कई सफेदपोश नेता उक्त लड़की को छुड़ाने का प्रयत्न कर रहे थे.

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