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सामाजिक कार्यकर्ता पंचदेव नहीं रहे, शोक की लहर


 -रविवार रात अस्पताल लाने के दौरान ली अंतिम सांस
- सामाजिक कुरीतियों, भ्रष्टाचार एवं सामंतवाद के खिलाफ लड़ते  रहे पंचदेव

मधुबनी। राम शरण साह 
समाज सेवी पंचदेव नहीं रहे। रविवार रात अस्पताल जाने के दौरान उनका निधन हो गया। उनके असामयिक निधन से जिले में शोक की लहर दौड़ गई। आधी रात से ही लोग उनके पार्थिव शरीर पर माल्यार्पण करने के लिए रामपट्टी स्थित लोहिया कर्पूरी इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कैंपस में पहुंचने लगे। साठ वर्षीय पंचदेव आजीवन सामाजिक कुरीतियों, अंधविश्वास, भ्रष्टाचार एवं सामंतवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ते रहे। 1977 के जे पी आंदोलन में वह सक्रिय रहे थे। जेपी के नेतृत्व में बनी छात्र युवा संघर्ष वाहिनी के वह सदस्य भी रहे। बाद में जन मुक्ति संघर्ष वाहिनी जसवा के सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में वह अपनी पहचान बनाई। पंचदेव ने 1991 में यहां लोहिया कर्पूरी इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नो!लॉजी में कार्यालय सचिव का पद संभाला। उसके बाद से वह मधुबनी जिला में सामाजिक कुरीतियों एवं भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद की। सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ-साथ दलित व शोषित वर्ग मैं उनकी अलग छाप है। भ्रष्टाचार और सामंतवाद के खिलाफ लड़ाई के दौरान उन्होंने कई बार जेल ही गए। लेकिन उनकी कर्मठता और साहस कम नहीं हुआ। अधिवक्ता दीनानाथ यादव ने कहा कि वह मानवता के सच्चे पुजारी थे। डा महेन्द्र नारायण कर्ण ने कहा कि वह निर्भिक और एक्टिव इंसान थे। वहीं भारत भूषण मंडल ने कहा कि पंचदेव के निधन से दलितों व शोषितों को गहरा धक्का लगा है।

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 सोमवार दोपहर लोहिया कर्पूरी इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी संस्था परिसर में ही उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान सीनियर अधिवक्ता दीनानाथ यादव, पूर्व विधायक सियाराम यादव, भारत भूषण मंडल, कामेश्वर कामत, डॉक्टर महेंद्र नारायण कर्ण, स्थानीय मुखिया अशोक कुमार यादव, अर्जुन मंडल, प्रियदर्शी उर्मिला देवी, हरिनारायण हर्ष, संतोष यादव, रामाधीन यादव, देवनाथ देवन, रामसुंदर महतो, राजदेव रमण, सीताराम पांडे, विवेकानंद यादव, कुंदन कुमार सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।

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