प्रशसनिक लापरवाही के कारण एक और बच्चे का मौत


प्रशासनिक लापरवाही से आज फिर एक बच्चे की मौत हो गई जबकि चार बच्चो को बचाने में ग्रामीण सफल रहे । मामला मधुबनी के झंझारपुर थानाक्षेत्र के कमला बलान तट की है । जहाँ आज सुबह अर्घ्य के दौरान पांच बच्चे नदी में नहाने उतरे थे जो अचानक डूबने लगे । स्थानीय लोगों की मदद से चार बच्चो को तो नदी से सुरक्षित निकाल लिया गया लेकिन एक बच्चा नदी में ही डूब गया । लोगों ने जब मौके पर उपस्थित एसडीआरएफ की टीम को बच्चे को ढुंढने की अपील तो उन्होने हाथ खड़ा कर दिया और वोट में तेल नही होने की बात कहने लगे । जिसके बाद ग्रामीणों ने अपने स्तर से वोट में तेल की व्यवस्था की जिसके बाद वोट को पानी में उतारा गया । इस दौरान एक घंटे से अधिक वक्त गुजर गये । लगातार सात घंटे की तलाशी के बाद शव को बरामद किया जा सका । मौके पर मौजूद अंचलाधिकारी ने भी माना की वोट में तेल ही नही था और व्यवस्था करने में कुछ समय लग गया । उन्होंने कहा कि तेल पंद्रह बीस मिनट की देरी से पहुंचा । वही एसडीआरएफ के कमांडेंट कृष्ण कुमार झा ने तो यह तक कह डाला कि तेल की व्यवस्था करना स्थानीय सीओ और एसडीओ का काम है । अब सवाल यह उठता है कि क्या SDRF की टीम लोगों को महज उपस्थिति दर्ज कराने पहुंची थी ? सवाल यह भी है कि क्या इन अधिकारियों की नजर में आम लोगो की जिंदगी का कोई महत्व नहीं है ? छठ से एक दिन पूर्व मधुबनी नगर परिषद की लापरवाही ने एक माँ की गोद सूनी कर दी तो वही आज सीओ और एसडीआरएफ की टीम की लापरवाही से एक गोद फिर सुनी हो गयी । आखिर इस मौत की जिम्मेवारी कौन लेगा यह बड़ा सवाल है ।

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