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देश की प्रतिष्ठा के लिये स्पॉन्सर्स की खोज में एक खिलाड़ी


सन 2000 के आस पास मीडिया में यह ख़बर आयी थी कि ओलम्पिक्स के लय्यात्मक जिमनास्टिक के इवेंट में पुरुषों की भी स्पर्धा शुरू होगी । लेकिन चुंकि लड़कियों की तरह की स्प्लिट्स लड़के नहीँ लगा सकते इस लिये लड़कों का फॉर्मेट अलग होगा ।सन 2001के दिसम्बर में हुए नेशनल गेम्स में एक बिहारी लड़के ने चल रहे फॉर्मेट में पोज कर उसका फोटो चुनौती के रुप में ऑर्गनाइज़िंग कमीटी को भेजा । फ़िर वही पोज सारे अंतरराष्ट्रीय खेलों में भी गयी और पहली बार ओलम्पिक 2004 में गयी । उस चुनौती को आज तक किसी ने भी नहीँ हराया ।अब एफ़ आई जी ( लय्यात्मक जिमनास्टिक की सबसे बड़ी संस्था ) की कथा सुनिये । उस व्यक्ति को एफ़ आई जी के टेक्निकल डाइरेक्टर मेडम आब्रुजीनी ने ई मैल से सूचित किया कि अब कमिटी ने फैसला किया है कि पुरुषों की स्पर्धा लय्यात्मक  जिमनास्टिक में नहीँ शुरू की जायेगी । एकाएक ऐसा पलटा असोसियेशन ने क्यों मारी यह आज तक एक रहस्य है ।लेकिन चुनौती तो चुनौती होती है , या तो हार मानो या जीत जाओ । यह व्यक्ति तो जीत गया बेशक उसके जीत को वो दर्जा नहीँ  मिला जो उसे मिलना चाहिये था । अफसोस की सरकार ने भी इस में उसका कोई साथ नहीँ दिया और रहस्यमय चुप्पी साधे रखा । कॉमन वेल्थ गेम्स 2010 से उस व्यक्ति ने पुराने पोज के साथ मार्शल आर्टस के फ्रंट किक को भी अपनी चुनौती में जोड़ दी । लेकिन फ़िर से ओलम्पिक चारो खाने चित्त गिरी । वह व्यक्ति संजीव कुमार झा है जो मधुबनी जिले के सौरठ गाँव का निवासी है । यह तो हुई पुरानी वात अब कुछ ताजा ख़बर भी है । इंटिग्रेटेड प्रोसेस सिस्टम और गिनीज़ वर्ल्ड रेकॉर्ड्स के सहयोग से केटेगरी मार्शल आर्टस और सब केटेगरी फास्टेस्ट फुल कॉंटेक्ट् किक के ट्राइयल में संजीव झा ने 180 डिग्री रोटेशन में एक सेकेंड से भी कम समय लिया है । जो की खुद में एक अन अफीशियल वर्ल्ड रेकॉर्ड है । इस क्रिया के माप के लिये हाई स्पीड केमरा का उपयोग किया गया । हाई स्पीड केमरा एक ऐसा यंत्र है जो प्रति सेकेंड हजारो फ्रेम ले सकतीं है ।इससे किसी बहुत तेज चलने वाली वस्तु की गति मापी जाती है । संजीव झा ने अब तक कई अंतर राष्ट्रीय संस्थाओं और कई कॉरपोरेट को पराजित किया है जिनमें शाओलिन टेंपल, रेड बुल इंटरनेशनल , के ए आई , आई ओ सी इत्यादि हैं ।अब इस वर्ल्ड रेकॉर्ड को अफीशियल करने के लिये फाइनल इवेंट करना होगा ।जिसके लिये करीब 5 लाख रुपये की आवश्यकता होगी ।करीब ढाई लाख रुपये तो सिर्फ हाई स्पीड केमरा का खर्च है । इसलिये संजीव झा स्पॉन्सर की तलाश में हैं तकि वो देश का नाम एक ऐसे खेल में रोशन कर सके जो पुरातन काल से आज तक सबसे लोकप्रिय खेल रहा है । इस प्रचीन खेल की लोकप्रियता और महत्व इसी तथ्य से आंकी जा सकतीं है कि इसी खेल की बदौलत ही दुनिया की आधी से अधिक आबादी खा रही है ।

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