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सरकारी स्कूलों में पढ़ाये जा रहे हैं बिहार के 'मुख्यमंत्री' नरेंद्र मोदी


राहुल झा : सूबे की शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक सुधार के लिए कई सकारात्मक कदम उठाए गए हैं जो जमीन पर कम कागजों में ज्यादा दिखती है. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा जहां धरातल पर चरमरा गई है. वहीं शिक्षा व्यवस्था बेपटरी होती जा रही है. विद्यालय में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति कम रहने से शिक्षा विभाग पर प्रश्न उठने लगा है. वर्ग तीसरी व चौथी के बच्चे जब मुख्यमंत्री तथा प्रधानमंत्री एवं उपमुख्ययमंत्री का नाम नहीं बता सके तो आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि पढ़ाई की स्थिति क्या होगी. मधुबनी मीडिया की पड़ताल में स्कूली शिक्षा व्यवस्था का जायजा लिया गया तो पता चला की बच्चों की जानकारी में बिहार के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी है. मधुबनी जिले के बेनीपट्टी प्रखंड मुख्यालय से 20 किलोमीटर की दूरी पर राजकीय प्राथमिक विद्यालय बलाईन पश्चिमी है. इस विद्यालय में कुल पांच शिक्षक है जिसमें चार शिक्षक उपस्थित थे वहीं एक शिक्षक गायब थे. विद्यालय में नामांकित बच्चे की संख्या 208 है जिसमें 10 बच्चे ही उपस्थित पाए गए. स्कुल के हेडमास्टर जहां अपने विद्यालय के बरामदे पर खड़े थे वहीं अन्य शिक्षक विद्यालय के बरामदे पर बैठे हुए थे, जबकि छात्र-छात्राओं की संख्या नगण्य पाई गई. बच्चे की उपस्थिति कम रहने के कारण 12.30 बजे के बाद रसोइया जलावन व बर्तन लेकर एमडीएम की भोजन बनाने के लिए चूल्हे के पास चली. 7 कमरे के विद्यालय में 7 कमरे में वर्ग का संचालन होता है. वहीं विद्यालय में 3 शौचालय है जहां दो की हालात काफी खराब है. एक शौचालय में ताला झूल रहा था वहीं चारों आरे से गंदगी का अंबार था. चापाकल एक है जहां सुचारू है. विद्यालय में रसोइया दो है जिसमें एक अनुपस्थित पाई गई. किचनशेड नहीं रहने के कारण विद्यालय भवन में एमडीएम की खाना बनाया जाता है.

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प्रभारी एचएम अभयनाथ पाठक ने बताया कि तीन दिनों से लगातार वर्षा होने के कारण बच्चे कम आते है उन्होंने कहा कि एमडीएम प्रतिदिन मेनू के अनुसार बनाया जाता है. ज्ञात हो कि एमडीएम के नाम पर सिर्फ सरकारी राशि की लूट हो रही है. विद्यालय में बच्चे उपस्थित रहते है दस एमडीएम बनता है एक सौ बच्चे का. विद्यालय के एचएम के लिये मध्याहन भोजन योजना कामधेनु साबित हो रही है.

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