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भीआईपी कार्यकर्ताओं एवं कोंग्रेसी नेताओं तकरार का फायदा किसे मिलेगा ? क्या महागठबंधन में सबकुछ ठीक नहीं है ?

न्यूज़ डेस्क पटना 
2014 के लोकसभा में नरेंद्र मोदी के साथ चुनाव प्रचार में नजर आये फिर बिहार विधानसभा चुनाव में अमित साह के साथ हेलीकॉप्टर में खूब उड़े लेकिन इस बार यानी 2019 में आकांक्षा कुछ बढ़ चुकी थी इसलिए खुद की पार्टी का गठन किया तेजस्वी यादव के साथ तालमेल बना कर चुनावी समर में कूद पड़े ! मैं बात सन ऑफ़ मल्लाह मुकेश सहनी की कर रहा हु जिसके आने के बाद महागठबंधन में सीटों का बँटवारा उलझ गया कांग्रेस के मंसूबों पर पानी फिर गया मंगनीलाल मंडल जैसे अतिपिछड़ा नेता का टिकट गुल हो गया और रहा सहा कसर पूरा करने के लिए बद्री कुमार पूर्वे को मधुबनी के चुनावी समर में उतार दिया गया ! राजनितिक नौसिखिये बद्री कुमार पूर्वे पर आते ही आयातित प्रत्यासी का ठप्पा लगा जिससे उबरे भी नहीं पाए थे की कांग्रेस के सकील अहमद एवं राजद के एम एस फातमी जैसे राजनीति के महारथी उन्हें चुनावी समर से ललकारने लगे ! हालांकि फातमी तो जल्द ही अपना बोरिया बिस्तर समेट कर दरभंगा लौट गए लेकिन सकील अहमद नहीं माने ! सामाजिक सरोकार और व्यक्तिगत संबंधो के बलबूते वे मैदान में अर गए ! सकील अहमद के इस फैसले से कोंग्रेसियो में जान आ गयी मधुबनी दरभंगा के क्षेत्र में एकलौती विधायक भावना झा समेत तमाम कोंग्रेसी कार्यकर्ता सकील के पक्ष में जा खड़े हुए ! यह परिस्थिति तब और विकट हो गयी जब महाठबंधन की बैठक में पहुंचे कोंग्रेसी कार्यकर्ताओं ने बैठक से वाकआउट कर दिया बाबजूद इसके की मुकेश सहनी बैठक में मौजूद थे और उन्होंने कोंग्रसी कार्यकर्ताओं को रोकने का प्रयास किया ! दरअसल इस बैठक में मुकेश सहनी खुद मौजूद थे और बैठक में भीआईपी उम्मीदवार के जीत का रणनीति तैयार किया जा रहा था ! बैठक में सभी दल के नेता अपना अपना विचार रख रहे थे और इसी बिच बारी आयी किसान कोंग्रस के मिथिलांचल प्रदेश अध्यक्ष हिमांशु कुमार की और उन्होंने जैसे ही कहा हम राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए आपलोगों से ज्यादा उत्सुक है और वोट मांगने में अधिक सक्रीय है ! जिसके बाद मुकेश सहनी के समर्थकों ने विरोध सुरु कर दिया उनका कहना था हम राहुल गांधी को प्रधानमंत्री प्रत्यासी नहीं मानते है ! जिसके बाद हंगामा बढ़ गया और कोंग्रेसी कार्यकर्ता मीटिंग से वाकआउट कर गए ! बात बिहार कोंग्रस के प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा तक पहुंची और देर शाम तक काफी मान मनौव्वल का खेल चलता रहा लेकिन तबतक तीर कमान से निकल चुकी थी और हिमांशु कुमार ने MADHUBANIMEDIA.COM को अपना बयान जारी कर दिया था ! चर्चा इस बात का भी है की आखिर दो बार तेजस्वी यादव ने मधुबनी का कार्यक्रम क्यों रद्द कर दिया ? यादव वोट बैंक में बिखराव का डर के साथ साथ कोंग्रेस खेमे की यह नराजगी भीआइपी के लिए चिंता का विषय बना हुआ है !

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