सड़क के अभाव में मुलभुत सुविधाओं से वंचित है यह गांव


सत्या नारायण सिंह : गांव के विकास के लिए हर गांव को सड़क से जोड़ने की सरकारी योजना वर्षों से चल रही हैं, लेकिन आज भी बिहार के मधुबनी जिला के नवटोली खुटौना गांव में सड़क का अता-पता नहीं है. जिले के खुटौना पंचायत नवटोली खुटौना में वार्ड  संख्या 14 व 15 में विकास के लिए घोषित कर इस ग्राम को विकास कार्यों से तो संतृप्त किया जा चुका है. मगर इस ग्राम को क्षेत्र के मुख्य मार्ग फुलपरास लौकहा रोड से जोड़ने वाले संपर्क मार्ग की खस्ताहाली समग्र विकास की हकीकत बयां करती नजर आ रही है. खुटौना लौकहा रोड से ग्राम नवटोली से निकलकर मेन रोड जयनगर  मेन रोड तक जाने वाला लगभग तीन किलोमीटर लम्बा रास्ता मार्ग लगभग 25 साल पहले जवाहर लाल ग्रामीण योजना के तहत बना था, लेकिन रख रखाव के अभाव में यह मार्ग जर्जर हो चूका है. जिसका नतीजा यह है कि वाहन तो दूर इस सड़क पर पैदल चलना भी दुर्लभ है. बारिश के दिनों में कई बार बड़े बुजुर्गो एवं महिलाओं को इलाज के लिए भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. 

स्थानीय राजेंद्र प्रसाद यादव (60) बताते हैं की  यहां की सड़क 25 साल से अधिक समय से नहीं बनी है. नतीजतन इस क्षेत्र के पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को बारिश के दिनो में उच्च स्तर की शिक्षा प्राप्त करने के लिये न ही कॉलेज जा पाते हैं और न ही व्यापारी और किसान अपना माल बाहर की मंडियों में ले जा पाते हैं. वहीं रामविलास महतो (55) ने बताया की इलाज के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही एंबुलेंस की सुविधा से भी यहां के लोग सड़क नहीं होने के कारण वंचित रह जाते हैं. गांव में एंबुलेंस न पहुंचने की प्रमुख वजह भी सड़क ही है. गांव में जब कभी भी किसी को एंबुलेंस की जरूरत पड़ती है तो उसे गांव के बाहर पैदल ही जाना पड़ता है. जिसके बाद ही उसे एंबुलेंस की सेवा मिल पाती है.

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कुछ दिनों पूर्व स्थानीय विधायक लक्ष्मेशवर राय एवं मुखिया व प्रखंड विकास अधिकारी खुटौना को कई बार लिखित आवेदन देकर भी ग्रामीणों ने सड़क की समस्या से अवगत करवाया था. शिकायत पर ध्यान देते हुए अधिकारियों ने मार्ग का निरीक्षण भी किया किन्तु नतीजा शून्य ही रहा. ग्राम पंचायत के उप मुखिया दिनेश कुमार कामत एवं 15 नं वार्ड सदस्य प्रदीप कुमार ठाकुर ने बताया की इस गांव तक पहुंचने के लिये रोड नहीं होने के कारण यह गांव दिनोंदिन हर क्षेत्र में पिछड़ता जा रहा है. विभाग की उदासीनता के कारण गांव का समग्र विकास का सपना अधूरा साबित हो रहा है.

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