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मधुबनी का एक गांव जो आज भी चचरी पुल के सहारे करता है जीवन यापन


प्रवीण ठाकुर : बासोपट्टी प्रखंड क्षेत्र के अर्घावा पंचयात के अन्तर्गत आने वाले एक गाँव कोरियानी भैयापट्टी आज भी दो दशक पीछे चल रहा है. तीस घरों और सेकड़ो लोगो की आबादी वाला ये गांव एक टापू पर बसा हुआ लग रहा है. जी हाँ क्योंकि गाँव के उत्तर और दक्षिण बना हुआ सड़क गाँव वाले को सुबह शाम चिढ़ाता रहता है. गाँव दोनों तरफ नदी से घिरा हुआ है. गाँव के दक्षिणी तरफ कोशी नहर है और नहर पर एक पुल भी बना हुआ है लेकिन पुल बनने का कोई फायदा ग्रामीणों को नहीं मिलता क्योंकि पुल तक जाने के लिए कोई सड़क नहीं है  पुल और गाँव की दुरी महज 200 मीटर है. परन्तु पुल निर्माण होने के पहले से ही उस रास्ते पर घर बना हुआ है. वही दूसरी और गाँव के उत्तर कमला नहर है और नहर के दूसरे तरफ प्रधानमंत्री सड़क का निर्माण है. लेकिन एक मात्र पुल के अभाव में ग्रामीण चचरी पुल के सहारे रोजमर्रा के काम को करते है. गाँव में तीन पहिया वाहन का प्रवेश नहीं हो पाता है. खास तोर पर जब कोई महिला या पुरुष बीमार पड़ता है तो उनका इलाज दूर दराज के अस्पताल में कराने के लिए खटिये का सहारा लेना परता है. अभी बारिश के मौषम में तो उनलोगो का जीना दुस्वार हो गया है. कितने बार विभागीय पदाधिकारियो को पुलिया निर्माण के लिए आवेदन दिया गया लेकिन दुर्भाग्यवश किसी ने कोई करवाई या पहल नहीं किया. क्षेत्र के विधायक को भी ग्रामीणों ने अपनी मज़बूरी बताया लेकिन वो भी इस मसले पर धृतराष्ट्र बने रहे. ग्रामीण राजदेव सिंह,रामप्रसाद सिंह,महेंद्र महतो,किसुन महतो,अरविन्द सिंह,फूल बाबू महतो सहित अन्य लोगो ने बताया की पिछले 15 वर्षो से हमलोग जयनगर और मधुबनी का चक्कर लगा रहे है.

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लेकिन अभी तक सिर्फ दिलाशा मिला है. स्थानीय विधायक और सांसदों को ग्रामीणों की लाचारी के बारे में बताया लेकिन चुनाब के समय पाँव पकर कर और बरे-बरे वादा करके सभी लोग भूल जाते है. लोगो ने अब सब कुछ ऊपर वाले के हाथो में छोर दिया है. इस मामले को लेकर स्थानीय पंचयात समिति सदस्य कुमारी पुष्पलता ने बताया की इस समस्या की जानकारी जिला पदाधिकारी को अपने स्तर से दूंगी अगर कोई पहल नहीं हुआ तो ग्रामीणों के साथ जिला मुख्यालय के समीप आमरण अनसन पर बैठूंगी.

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